नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान भारतीय सेना और चीन को लेकर की गई कथित टिप्पणी पर दर्ज मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई की। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को फटकार लगाते हुए पूछा, “आपको कैसे पता चला कि चीन ने 2000 किलोमीटर तक भारत की जमीन पर कब्जा कर लिया है? अगर आप सच्चे भारतीय होते, तो ऐसी बातें नहीं करते।”
अदालत ने आगे कहा, “आप विपक्ष के नेता हैं, तो इस तरह की टिप्पणियां सोशल मीडिया पर क्यों कर रहे हैं? ये सवाल आप संसद में क्यों नहीं उठाते?” इस पर राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने जवाब दिया कि राहुल गांधी ने चुनाव संसद में बोलने के लिए नहीं लड़ा, बल्कि उन्हें संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है।
सिंघवी ने यह भी दलील दी कि राहुल गांधी को इस मामले में “प्राकृतिक न्याय” का अवसर नहीं मिला। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में यह तर्क नहीं रखा और सुप्रीम कोर्ट में दाखिल विशेष अनुमति याचिका (SLP) में भी यह मुद्दा नहीं उठाया गया।
सुनवाई के अंत में कोर्ट ने राहुल गांधी को अंतरिम राहत देते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया और निचली अदालत में चल रही कार्यवाही पर फिलहाल रोक लगा दी।
यह मामला राहुल गांधी द्वारा 9 दिसंबर 2022 को भारत-चीन सीमा पर हुई झड़प के बाद भारतीय सेना और जमीन कब्जे को लेकर की गई टिप्पणी से जुड़ा है, जिस पर उत्तर प्रदेश में उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज हुआ था।